सन्त बचन

Ultimate Realization of Truth

“One thing: you have to walk, and create the way by your walking; you will not find a ready-made path. It is not so cheap, to reach to the ultimate realization of truth. You will have to create the path by walking yourself; the path is not ready-made, lying there and waiting for you. It is just like the sky:…

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सन्त बचन

परख

परख – एक कथा एक मन्दिर में एक संन्यासी रहा करते थे। मंदिर के ठीक सामने ही एक वैश्या का मकान था। वैश्या के यहाँ रात−दिन लोग आते−जाते रहते थे। यह देखकर संन्यासी मन ही मन कुड़−कुड़ाया करता। उस संन्यासी ने यह हिसाब लगाने के लिए कि उसके यहाँ कितने लोग आते हैं एक−एक पत्थर गिनकर रखने शुरू कर दिये।…

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सन्त बचन

या जग में कोई सुख न देखो

श्री हज़ूर स्वामी जी महाराज ने एक जगह फ़रमाया है – या जग में कोई सुख न देखो | गहो गुरु के बचननियाँ || दुःख के जाल फँसे सब मुरख | तू क्यों उन संग फंसननियाँ || मेरी समझ से, स्वामी जी महाराज के भाव है- हमें लगता है कि इस दुनिया में लोग सुखी है लेकिन असलियत यह है…

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सन्त बचन

सब घट मेरा साइयाँ

कबीर साहिब ने फ़रमाते है – सब घट मेरा साइयाँ, सूनी सेज न कोय || बलिहारी वा घट्ट की, जा घट परघट होय|| भावार्थ – हर घट यानी शरीर के भीतर, मेरा ही परमात्मा (साइयाँ) निवास करता है।  कोई भी उससे (रब से) खाली नहीं है| जिसका मतलब यह है, परमात्मा का घर, कहीं बहार नहीं है, वह घर हम…

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